शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

एक घंटे में पूरा बिहार देखो


अमेजिंग, पर सच्चाई है। शायद आपको यह सुनकर अजीब लगे कि बिहार की परिक्रमा महज एक घंटे में पूरी की जा सकती है। सोचिए, जब बिहार में यहां से वहां तक, इस कोने से उस कोने तक, बक्सर से कटिहार या फिर पश्चिम चंपारण से गया तक मात्र एक घंटे में जा सकते हैं। ये सब तब होगा, जब राज्य सरकार चार से पांच सौ करोड़ रुपए का इंवेस्टमेंट करेगी। इसके बाद पूरा बिहार 'अपना' हो जाएगा, अपने करीब हो जाएगा। इतना ही नहीं, बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ जैसी त्रासदी से भी आसानी से निपटा जा सकेगा। हम आपको सपने नहीं दिखा रहे हैं, ये सब सच हो सकता है। क्योंकि सिर्फ पटना में ही नहीं, पूरे बिहार में एयरबेस का जाल बिछा हुआ है। वह भी ऐसा जाल जिसे वर्षो पहले बनाया गया था। पर, पिछले चालीस से भी अधिक सालों से ध्यान न दिए जाने के कारण ये एयरबेस लगभग गायब से हो गए हैं। अगर गवर्नमेंट थोड़ा ध्यान दे दे, तो पूरा बिहार एक घंटे का हो जाएगा।




कभी देखा है इन्हें

ठीक वैसे ही, जैसे किसी क्विज कांटेस्ट में पूछा जाता है, हम भी आपसे एक सवाल करते हैं? क्या आप बता सकते हैं कि बिहार में कितने स्थानों से उड़ान भरी जा सकती है? आपको यह बताने में थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़े, क्योंकि खुद स्टेट गवर्नमेंट ही नहीं, सेंट्रल गवर्नमेंट और हमारे आस-पास रहने वाले किसी का भी ध्यान इस सवाल की ओर गया ही नहीं था। हां, अब पिछले कुछ महीनों में स्टेट गवर्नमेंट ने बिहार में वर्षो से उपेक्षित पड़े एयरबेस की ओर अपना कंसन्ट्रेशन बढ़ाया है।



स्टेट में हैं 29 एयरबेस

क्विज में पूछे गए प्रश्न का जवाब शायद लोगों को न पता हो या हो सकता है कुछ लोगों को इसके बारे में जानकारी हो। बावजूद, हम आपको बताते हैं कि बिहार में 29 एयर बेस हैं। लेकिन लोगों की नासमझी और गवर्नमेंट का इस ओर ध्यान न होने के कारण बिहार के हर डिस्ट्रिक्ट में बनाए गए ये एयरबेस आज कहीं गुम से हो गए हैं। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इन एयरबेस का निर्माण आज से करीब दशकों पहले अंग्रेजों ने कराया था।



अंग्रेजों ने डेवलप किए थे

हम यहां जिन एयरबेस की चर्चा कर रहे हैं, उनकी नींव अंग्रेजों के शासनकाल में रखी गई थी। यह खुलासा हाल में किए गए एक सर्वे के बाद हुआ है। सर्वे रिपोर्ट बताती है कि एशिया महाद्वीप में जिस वक्त अंग्रेजी साम्राज्य की हुकुमत चलती थी, उस दौरान सेना के अफसरों को इंग्लैंड से बर्मा तक ले जाने के लिए देशभर में अंग्रेजों ने एयर बेस बनवाए थे।



बने हैं खड़ी ईट पर

स्टेट में जितने भी एयरबेस अब तक पहचान में आए हैं, उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आज भी उतने ही कारगर हैं जितने कि पचास साल पहले थे। इन एयरबेस की खोज और उनके भविष्य की प्लानिंग पर काम करने के इच्छुक कैप्टन मनोज कुमार सिंह बताते हैं कि अंग्रेजों ने आज से पचास साल पहले जिस टेक्निक का इस्तेमाल किया वह काबिल-ए-तारिफ है। श्री सिंह के अनुसार जितने भी एयरबेस उन्होंने अब तक देखें हैं सबकी खासियत यह है कि एयरपट्टी पर खड़ी ईटों का इस्तेमाल किया गया है। शायद यही एक वजह है कि आज भी ये एयरबेस मामूली सी रकम खर्च करने पर दोबारा काम करने लायक हो सकते हैं और स्टेट गवर्नमेंट ने इस दिशा में काम शुरू भी कर दिया है।



सिस्टमेटिक डेवलपमेंट की जरूरत

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर स्टेट गवर्नमेंट इन सभी एयरबेस का सिस्टमेटिक डेवलपमेंट करे, तो फ्लड से और भी बेहतर तरीके से बिहार की तबाही निपटा जा सकता है। जानकार बताते हैं कि बिहार में फ्लड की सिचुएशन में रेसक्यू ऑपरेशन अभी पटना से चलाना होता है। अगर बाढ़ सीतामढ़ी में आई है तो यहां से चॉपर उड़ान भरते हैं। इससे टाइम मैनेजमेंट तो नहीं ही हो पाता है। पैसों की भी बर्बादी होती है। अगर इन एयरबेस को ठीक कंडीशन में ला दिया जाए, तो सीतामढ़ी की बाढ़ से मोतिहारी से ही रेसक्यू ऑपरेशन चलाया जा सकता है। ऐसे ही दूसरे कामों में भी इन एयरबेस की बड़ी भूमिका हो सकती है। जरूरत पड़ने पर अति आवश्यक सामग्री जैसे दवा, गैस सिलेंडर, क्रिटिकल सिचुएशन में भोजन जैसी चीजें भी एक स्थान से दूसरे स्थानों पर पहुंचाई जा सकती हैं।



बढ़ानी होगी लेंथ

पुराने जमाने में बनाए गए एयरबेस की सिर्फ एक खामी है। ये एयरबेस या तो काफी कम लेंथ में हैं या फिर अगर लेंथ है भी तो आज इनका इंक्रोचमेंट किया जा चुका है। जानकारों का मत है कि आज बिहार में जितने भी एयरबेस चिह्नित किए गए हैं, उनमें से अधिकतर की लेंथ 1900 फीट से ज्यादा नहीं है। अगर इन्हें काम करने लायक बनाना है तो इनकी लंबाई को कम से कम छह हजार फीट करना होगा। लेंथ बढ़ाने, टर्मिनल बिठाने के साथ ही दूसरी सुविधाएं इन एयरबेस में डेवलप कर दी जाएं, तो यहां कल से उड़ान भरी जा सकेंगी। सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाकर स्टेट गवर्नमेंट ने बिहार के डिफरेंट एयर बेस को जिन्दा करने का काम शुरू कर दिया है। इस कड़ी में भागलपुर, किशगंज, सहरसा, मधुबनी, मुंगेर, छपरा एयरबेस के चारों ओर ऊंची बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू हो चुका है। गवर्नमेंट की प्लानिंग बचे हुए दूसरे एयरबेस को भी इसी प्रकार से डेवलप करने की है।
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_6084498/