मंगलवार, 6 अक्तूबर 2009

डेढ़ करोड़ साल पहले गर्म था अंटार्कटिका


अंटार्कटिका यानी दूर-दूर तक फैली बर्फ और हाड़ कंपाती ठंड। दुनिया के सात महाद्वीपों में शुमार अंटार्कटिका हमेशा से ऐसा नहीं था। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि करीब एक करोड़ 57 लाख साल पहले अंटार्कटिका में गर्म हवाएं चला करती थीं। तब वहां वनस्पति व शैवाल [एल्गी] भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते थे।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज जलवायु परिवर्तन को समझने में बेहद मददगार साबित हो सकती है। एलएसयू म्यूजियम आफ नेचुरल साइंस के नेतृत्व में गठित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने जीवाश्मों के अध्ययन में पाया कि अंटार्कटिका में कुछ हजार साल पहले ही गरम वातावरण खत्म हुआ था। वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म जीवाश्मों के लिए 1107 मीटर अवसाद का अध्ययन किया जिसमें उन्हें दो मीटर मोटी परत में काफी मात्रा में जीवाश्म मिले।

वैज्ञानिकों की राय में, 'यह बेहद असाधारण है क्योंकि अंटार्कटिक में जमी बर्फ का निर्माण करीब तीन करोड़ 50 लाख साल पहले हुआ था। अत्यधिक कम तापमान में किसी भी वनस्पति व शैवाल का पैदा होना काफी मुश्किल है। प्रमुख शोधकर्ता सोफी वार्नी ने बताया कि नए नमूनों के अध्ययन से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अंटार्कटिका में डाइनोफ्लागेट सिस्ट [समुद्री या ताजे पानी में पाई जाने वाली वनस्पति] की मौजूदगी में 2000 गुना, शैवाल में पांच गुना और परागकणों में 80 गुना वृद्धि देखी गई। यह सब उस समय था जब अंटार्कटिका अपेक्षाकृत गर्म था। इस नए शोध से हमें जलवायु परिवर्तन को समझने में मदद मिलेगी।' परागकण, बीजाणु व डाइनोफ्लागेट्स सिस्ट जैसे अत्यंत छोटे कणों की मौजूदगी इस बात की पुष्टि करते हैं कि डेढ़ करोड़ साल पहले थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन अंटार्कटिका में गर्म वातावरण रहा होगा।

वार्नी के मुताबिक 'शोध में मिले माइक्रोफासिल से हमें यह जानने में मदद मिलेगी कि उस समय अंटार्कटिका में वास्तव में कैसा वातावरण था और उस दौरान वहां क्या हुआ।