सोमवार, 21 सितंबर 2009

अंध्विस्वाश की अदालत



भभुआ। मानव की अंतरिक्ष में छुट्टियां मनाने और चांद पर बस्तियां बसाने की योजना के बीच, बिहार के कैमूर जिले में अंधविश्वास के चलते भूतों की अदालत लगती है जिसमें कथित तौर पर भूत, डायन और चुड़ैल से मुक्ति दिलाई जाती है।

यह अदालत नवरात्र के दौरान लगती है। इस वर्ष भी नवरात्र शुरू होते ही कैमूर जिले के केचैनपुर प्रखंड स्थित हरसू ब्रह्माधाम में कथित भूत प्रेत आदि बाधाओं से पीड़ित लोग पहुंच रहे हैं।

किसी का कहना है कि उसके सर पर उसके पड़ोसी ने भूत बिठा रखा है तो कोई कहता है कि श्मशान के पास से गुजरते समय उस पर भूत सवार हो गया। कोई कुलदेवता की नाराजगी से परेशान है तो कोई किसी तांत्रिक से पीछा छुड़ाने की बात करता है। किसी को आशंका है कि प्रेत बाधा के कारण वह संतान सुख से वंचित है तो किसी को व्यापार में हानि हो रही है।

राजधानी दिल्ली के जाने माने मनोविज्ञानी समीर पारेख भूत प्रेत आदि की बातों को सिरे से नकारते हुए कहते हैं कि यह अंधविश्वास के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि हम जिस जगह पर रहते हैं उसके आसपास के माहौल का हम पर गहरा असर होता है। वहां प्रचलित कोई विचार इतना गहरा होता है कि लोग उसी पर अमल करते रहते हैं और उसकी सच्चाई की तह तक नहीं जाते।

राजस्थान से जी एस पटेल अपने पुत्र सतीश को लेकर हरसू ब्रह्माधाम पहुंचे। उनका कहना था कि उनके पुत्र का प्रेत बाधा के कारण मानसिक संतुलन बिगड़ गया था और हरसू ब्रह्माधाम पहुंच कर उसे इससे मुक्ति मिल गई।

हरसू ब्रह्माधाम में ओझा भूत उतारने के लिए मंत्र बुदबुदाते हुए पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर छड़ी घुमाता है फिर पीड़ित की छड़ी से पिटाई करता है। पीड़ित चीखता चिल्लाता है। ओझा उससे पूछता है 'कौन हो तुम'। अगर इस सवाल के जवाब में पीड़ित 'भूत या चुडै़ल' कहता है तो उसकी बुरी तरह पिटाई की जाती है।

यहां स्थानीय भाषा में ओझा को सोखा कहा जाता है। पीड़ित को पीटते हुए सोखा कथित भूत से चले जाने को कहता है। इसके बाद पीड़ित ठीक हो जाता है।

डा समीर पारेख स्पष्ट करते हैं कि यह मानसिक रोग या भूत प्रेत वाली कोई बात नहीं है। यह जो कुछ है वह उसी गहरी सामाजिक धारणा का असर है जो अंधविश्वास की वजह से लोगों के मन में गहरे तक जमी होती है। कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाते हुए धन कमाने लग जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से बलजीत मिश्र अपनी पत्नी को लेकर दो साल पहले यहां आए थे। इस निसंतान दंपत्ति को लगता था कि किसी बाधा की वजह से वे संतान सुख से वंचित हैं। हरसू ब्रह्माधाम आने के बाद उन्हें पुत्र हुआ और इस साल वे आभार व्यक्त करने यहां आए हैं।

इस बारे में डा पारेख कहते हैं कि इस तथ्य को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता और न ऐसे कोई वैज्ञानिक प्रमाण हैं।

कुष्ठ रोग से ग्रसित महाराष्ट्र के अमरावती के सुभाष पवार इससे निजात पाने के लिए यहां पहुंचे हैं और उन्हें उम्मीद है कि बाबा के दरबार से वे खाली नहीं लौटेंगे।

हरसू ब्रह्माधाम स्थित मंदिर के पुजारी पंडित राजकेश्वर त्रिपाठी ने बताया कि यहां पहुंचते ही लोगों के दैहिक, दैविक एवं भैतिक तीनों प्रकार के कष्ट स्वत: दूर हो जाते हैं। पुजारी ने कहा कि स्थानीय लोगों के अलावा यहां देश के अन्य राज्यों से भी लोग आते हैं।