बुधवार, 30 सितंबर 2009

शाकाहार की महिमा


शाकाहार मांस न खाने को कहा गया है। सनातन धर्म में शाकाहारी होना अनिवार्य नहीं, पर यह प्रबुद्ध व्यक्ति, वेदव्यास, भीष्म, आदि शंकराचार्य, पतञ्जलि (योगसूत्र), वल्लभाचार्य, स्वामिनारायण, महात्मा गांधी और बहुत-से स्वामी के आचरण से जोडा जाता है। अहिंसा और करुणा शाकाहार का तत्त्व हैं। अहिंसा को परम धर्म माना जाता है (अहिंसा पर्मो धर्म:)| भारतीय संस्कृति में हमेशा से शाकाहार की महिमा पर जोर दिया गया है, लेकिन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के कई अध्ययनों के बाद शाकाहार का डंका अब विश्व भर में बजने लगा है। शरीर पर शाकाहार के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए दुनियाभर में लोगों ने अब मांसाहार से किनारा करना शुरू कर दिया है।

विश्वभर के शाकाहारियों को एक स्थान पर लाने और खुरपका-मुंहपका तथा मैडकाऊ जैसे रोगों से लोगों को बचाने के लिए उत्तरी अमेरिका के कुछ लोगों ने 70 के दशक में नॉर्थ अमेरिकन वेजिटेरियन सोसाइटी का गठन किया। सोसाइटी ने 1977 से अमेरिका में विश्व शाकाहार दिवस मनाने की शुरुआत की। सोसाइटी मुख्य तौर पर शाकाहारी जीवन के सकारात्मक पहलुओं को दुनिया के सामने लाती है। इसके लिए सोसाइटी ने शाकाहार से जुड़े कई अध्ययन भी कराए हैं।


दिलचस्प बात यह है कि सोसाइटी के इस अभियान के शुरू होने के बाद से अकेले अमेरिका में लगभग 10 लाख से ज्यादा लोगों ने मांसाहार को पूरी तरह त्याग दिया है। विश्व शाकाहार दिवस के अवसर पर आहार विशेषज्ञ डा. अमिता सिंह ने बताया कि हाल के एक शोध के मुताबिक शाकाहारी भोजन में रेशे बहुतायत में पाए जाते हैं और इसमें विटामिन तथा लवणों की मात्रा भी अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।

डा. अमिता ने बताया कि ऐसे भोजन में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे मोटापा कम होता है। मांसाहार की तुलना में शाकाहारी भोजन में संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है, जिससे यह हृदय रोगों की आशंका कम करता है।

आहार विशेषज्ञ डा. अंजुम कौसर ने बताया कि अनाज, फली, फल और सब्जियों में रेशे और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं, जो कैंसर को दूर रखने में सहायक होते हैं। डा. कौसर ने बताया कि उनके पास कई ऐसे मरीज आए, जिन्होंने मांसाहार त्यागने के बाद अपने स्वास्थ्य में कई सकारात्मक परिवर्तन देखे।


फिजीशियन डा. केदार नाथ शर्मा ने बताया कि बहुत से लोग गोश्त को अच्छे स्वाद के नाम पर तेज मसाला डाल कर देर तक पकाते हैं। इस प्रक्रिया से पका गोश्त खाने पर कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम को बहुत नुकसान पहुंचता है। यह भोजन रक्तचाप बढ़ाने के साथ रक्तवाहिनियों में जम जाता है, जो आगे चल कर दिल की बीमारियों को न्यौता देता है।

पिछले दिनों अमेरिका के एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने इस बात को प्रमाणित किया कि मांसाहार का असर व्यक्ति की मनोदशा पर भी पड़ता है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि लोगों की हिंसक प्रवृत्ति का सीधा संबंध मांसाहार के सेवन से है। अध्ययन के परिणामों ने इस बात की और संकेत दिया कि मांसाहार के नियमित सेवन के बाद युवाओं में धैर्य की कमी, छोटी-छोटी बातों पर हिंसक होने और दूसरों को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

सोसाइटी की गतिविधियां शुरूआत में अमेरिकी उपमहाद्वीप तक सीमित रहीं, लेकिन बाद में इसने अपने कार्यक्षेत्र को यूरोपीय महाद्वीप समेत पूरे विश्व में फैलाया। एक अक्टूबर के दिन दुनिया भर में शाकाहार प्रेमी मांसाहार के नुकसान के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।


हाल ही में किए गए एक शोध के मुताबिक पता चला है कि शाकाहारी लोगों को कैंसर का खतरा कम होता है ।
तो शाक सब्ज़ी खायें और इस नामुराद बीमारी से बचें ।

शाकाहार जीवन को दीर्धायु, शुद्ध, बलवान एवं स्वस्थ बनाता है। शाकाहारी भोजन मन में दया, समानता, आपसी स्नेह और सहनशीलता उत्पन्न करता है। शारीरिक नैतिक और आध्यात्मिकसभी दृष्टि से शाकाहारी
भोजन मानव के लिये सर्वोत्तम है। शाकाहारी अधिक उत्पादक हैं और कम से कम अपव्ययी है। दुर्बल रोगी फलों अथवा सब्जियों के रसों का उपयोग कर स्वास्थय लाभ प्राप्त कर सकता है। मनुष्य के दाँतों और दाँतों की रचना शाकाहारी भोजन के लिये की है। फलाहार विटामिन की कमी के कारण होने वाले रोगों से बचाव व छुटकारा देता है।