गुरुवार, 17 सितंबर 2009

पहली बार भारतीय सरहद पर लड़कियों की तैनाती


वे हुई तैनात, अब हमें भी मिल जाए मौका

नई दिल्ली। देश के इतिहास में पहली बार भारतीय सरहद पर लड़कियों की तैनाती ने उन लड़कियों की आशाओं को पंख लगा दिए हैं, जो भविष्य में सेना में जाने के सपने संजोए हुए हैं।


देशभक्ति से ओत-प्रोत यह लड़कियां अब भारत की सीमाओं की चौकसी का 'एक मौका' पाने को बेताब हैं। सैन्य शास्त्र की छात्रा श्रुति सराठे ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के इस कदम से हम बहुत उत्साहित हैं। अभी तक हमें सिर्फ सेना से जुड़े सामान्य कार्यो में भाग लेने का
मौका मिलता था, लेकिन अब सरहद पर तैनाती से देश की रक्षा से सीधे तौर पर जुड़ने का मौका मिलेगा। श्रुति ने कहा कि लड़कियों में अब सीमा पर तैनाती के प्रति भी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सेना में जाने वाली हर लड़की सरहद पर तैनात होने का एक मौका पाना चाहेगी।

सीमा पर तैनात लड़कियों से मिलने की इच्छा व्यक्त करते हुए सैन्य शास्त्र, स्नातकोत्तर की छात्रा अंजना धोटे ने कहा कि जब मैंने सैन्य शास्त्र में दाखिला लिया, तो सोचा भी नहीं था कि लड़कियों को देश सेवा से सीधे तौर पर ऐसे जुड़ने का मौका मिलेगा। लड़कियों को देश की सबसे अहम सीमा 'भारत-पाक' पर तैनात होने का मौका मिलना एक ऐतिहासिक कदम है।
सीमा पर तैनात होने वाली लड़कियां हमारी आदर्श हैं और अब हम उनसे मिलने के इच्छुक हैं। सीमा सुरक्षा बल के इस फैसले को स्वागतयोग्य कदम बताते हुए भोपाल के मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय के सैन्य शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डा. कैलाश त्यागी ने फोन पर बताया कि इस फैसले से लड़कियों में सेना के प्रति निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ा है। हमारे विभाग में मौजूदा सत्र में लगभग 70 फीसदी लड़कियां हैं, जो अखबारों में इस खबर को पढ़कर खासी उत्साहित हैं।


डा. त्यागी ने कहा कि अब तक लड़कियों को ऐसे मौके नहीं मिलते थे, लेकिन अब यह मौका भी मिल रहा है, जिसके चलते लड़कियां स्वयं को साबित करने के लिए बेताब हैं। उन्होंने कहा कि अब वे अपने विभाग की लड़कियों को सीमा की परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार कराएंगे। सेना में पूर्व लेफ्टिनेंट संगीता सैम्युअल ने कहा कि लड़कियों के लिए यह एक स्वर्णिम मौका है, जो इसके पहले उन्हें कभी नहीं मिला था।