शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

धुन के पक्के

धुन के पक्केfrom danik jagran
Sep 10, 11:22 pmबताएं
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दोस्तो, जुनून एक हिडेन एनर्जी है, जिसका साथ मिल जाए, तो हो सकते हैं बड़े-बड़े कमाल। यह एक ऐसी शक्ति है, जिसकी बदौलत तुम अपना नाम उन रोल मॉडल प्रोफाइल्स में शामिल कर सकते हो, जिन पर दुनिया नाज करती है। आज बात करते हैं ऐसे ही कुछ जुनूनी यानी धुन के पक्के लोगों से, जिनकी कामयाबी एक मिसाल बन चुकी है।

[चार्ली चैपलिन]

हॉलीवुड के इस मशहूर हास्य अभिनेता का पूरा नाम था चार्ली स्पेंसर चैपलिन। वे एक ऐसे आर्टिस्ट थे, जो काम को घंटों में बांटकर नहीं करते थे। बस एक बार धुन सवार हो जाए, तो फिर लगातार उस काम में जुटे रहना उनकी आदत थी। अपना बेस्ट देना है, यही उनकी सोच थी। इसी कारण वे बहुत छोटी उम्र में ही एक जाने-माने आर्टिस्ट बन गए। इतना ही नहीं, इस अमर कलाकार का जुनून कभी खत्म नहीं हुआ। अस्सी वर्ष की उम्र में भी उनमें वही ऊर्जा थी, जो कभी युवा उम्र में रही थी। जिस दिन उन्होंने आखिरी सांस ली, उस समय भी वे एक रेगुलर एम्प्लॉई के रूप में अपने कार्यालय में कार्य कर रहे थे।

[डॉन ब्रैडमैन]

सर डॉन ब्रैडमैन का नाम क्रिकेट का पर्याय बन चुका है। इन्हें क्रिकेट का भगवान भी कहा जाता है। क्रिकेट के प्रति जुनून, खासकर बैंटिंग से उनका लगाव बचपन से ही था। वे गोल्फ की बॉल से दीवार पर कुछ इस तरह से शॉट लगाते कि लोग चकित रह जाते। कुछ उनकी कॉपी करने की कोशिश करते, पर ठीक वैसा ही बॉल पर नियंत्रण पाना किसी के वश की बात नहीं थी। उन्होंने पहला मैच महज ग्यारह साल की उम्र में खेला और पहली सेंचुरी बनाई बारह साल की उम्र में। फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बन गए एक लेजेंड क्रिकेटर।

[पीट सैम्प्रास]

ऑल टाइम फेवरेट स्पो‌र्ट्समैन में नाम लिया जाता है पीट सैम्प्रास का। यह अमेरिकी टेनिस प्लेयर जब कोर्ट पर होता था, तो उस दौरान उनका खेलने का तरीका हर किसी को हैरान कर जाता। जीत हो या हार, उनके चेहरे पर एक ही भाव बना रहता। ऐसा लगता कि वे एक ही लक्ष्य-बेस्ट परफॉर्मेंस में विश्वास करते हैं। इसी का परिणाम था कि वे पंद्रह साल के अपने करियर में कुल चौदह ग्रैंड स्लैम जीत चुके थे। फिर कई तरह के रिकॉर्ड उनके नाम हुए, जिन्हें तोड़ना हर खिलाड़ी का सपना और लक्ष्य बन गया। टेनिस के प्रति जुनून उनमें बचपन से ही था। महज तीन साल की उम्र में ही रैकेट पकड़ना सीख गए थे। उनकी प्रतिभा की भनक जब उनके अभिभावकों को लगी, तो उन्होंने सैंप्रास को पूरा सपोर्ट दिया। अपनी लगन की बदौलत ग्यारह वर्ष की छोटी उम्र में ही पीट ने अपने रोल मॉडल रोड लीवर के साथ मैच खेलने का सपना भी पूरा कर लिया।

[वाल्ट डिज्नी]

यदि तुम यह सोच रहे हो कि वाल्ट डिज्नी केवल डिज्नीलैंड के निर्माता हैं, तो अपनी जानकारी में इजाफा कर लो। वाल्ट डिज्नी फिल्म प्रोड्यूसर, एनिमेटर और थीम पार्क डिजायनर भी थे। मिकी माउस के जन्मदाता वाल्ट डिज्नी को एक दो नहीं, कई एकेडमी अवॉर्ड मिले और 26 ऑस्कर अवॉर्ड भी।

उनका बचपन बहुत शानदार नहीं था। वे आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से थे। बचपन में ही उनके एक मित्र ने उन्हें एनिमेशन व‌र्ल्ड से परिचित कराया। फिर क्या था, आर्टिस्ट डिज्नी को जैसे उनकी मंजिल मिल गई। उनकी राह में कई तरह की मुश्किलें आई। वे कभी एम्बुलेंस ड्राइवर बने, तो कभी दिन के समय स्कूल और रात में जागकर नाइट कोर्स किया। वे एक स्कूल के न्यूजपेपर में कार्टूनिस्ट भी बने। काम की तलाश में घर भी छोड़ा। उन्हें बस एक ही धुन थी-अपने लिए एक मनपसंद करियर की तलाश। इस दौरान ऐसा भी दिन आया, जब उन्हें कहीं भी काम नहीं मिल रहा था। वे एक एड फिल्म कंपनी के एनिमेशन आर्ट से बेहद प्रभावित थे। वाल्ट उससे बड़ा और कुछ अलग करना चाहते थे। यह धुन उन जैसे सवार हो गया और एक दिन यह जुनून रंग लाया और वे बन गए एक महान रोल मॉडल।

[मैक्सिम गोर्की]

अगर हौसला हो, तो जुनूनी व्यक्ति अपनी राह खुद तलाश लेता है। इसका बेहतरीन उदाहरण हैं मैक्सिम गोर्की। वे अनाथ थे। माता-पिता की गैरमौजूदगी में दादी ने उन्हें पाला। लेकिन दादी के चल बसने के बाद वे अकेले हो गए। अकेलेपन के दिनों में स्कूल की पढ़ाई काम आई। हालांकि उन्हें स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ना पड़ा, लेकिन जीवन के कड़वे अनुभव ने उन्हें काफी कुछ सिखा दिया। उन्होंने जीवन बसर करने के लिए कई तरह के काम किए, लेकिन जब लिखना शुरू किया, तो दुनिया दंग रह गई। मैक्सिम गोर्की के लेखन से अंदाजा लग जाता था कि वे अपने विषय पर कितना मेहनत करते हैं। तभी उसका प्रभाव काफी गहरा होता था। बाद में वे एक महान लेखक और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट बनकर उभरे।

पैशन हम सब के अंदर है। यह एक प्रकार का रिएक्शन होता है। काफी ऊर्जा होती है इस इमोशन में। कुछ लोग पैशन का सकारात्मक इस्तेमाल कर जाते हैं, तो कुछ इस असीम ऊर्जा को गलत दिशा दे देते हैं। बड़े-बड़े चमत्कार हो जाते हैं, यदि आपका जुनून सही दिशा में हो। लेकिन सवाल है कि क्या हर व्यक्ति सक्षम है ऐसा करने में? बेशक हर व्यक्ति में यह साम‌र्थ्य है। पर कोई ऐसा करने में सफल है, तो इसमें उसकी अपनी सूझ-बूझ अपनी काबिलियत का हाथ होता है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि अपना एक लक्ष्य बनाएं। उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करें, सही तरीका अपनाएं। भावुक होकर नहीं, विवेक से हर फैसला लें। जो ऐसा करता है, वही जा सकता है आगे और आगे..। -पूर्व निदेशक, सीबीआई

[सीमा झा]