सोमवार, 7 सितंबर 2009

पटना का मैरिन ड्राइव जमीन पर उतरने की तैयारी में

यह लेख दैनिक जागरण से लिया गया है -

पटना। गंगा की बलखाती लहरों के साथ स्पीड की जुगलबंदी। और इस सफर मेंअगर बच्चे साथ हैं,तो उनके लिए झूले से लेकर लजीज व्यंजनों वाले रेस्टोरेंट भी। चौड़ी-सरपट सड़कें आपको जाम से निजात तो दिलायेंगी ही, साथ ही शहर को मिलेगी एक नयी चकाचक सड़क। यूं तो राजधानी में इस तरह की बात अभी ख्वाब जैसी जरूर लगती है, पर इसे सच करने का प्रयास तेज हो रहा है। प्राचीन तट से गंगा के दूर जाने से निकली जमीन मुंबई की मशहूर मैरिन ड्राइव जैसी सपनीली सड़क विकसित करने के काम आयेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरने की तैयारी में है।

आईएलएंडएफएस ने गंगा किनारे दीघा से लेकर दीदारगंज तक बनने वाली सड़क की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पथ निर्माण विभाग को सौंप दी है। आईएलएंडएफएस ने मुख्यमंत्री को पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से पूरी योजना को विस्तार से पिछले दिनों दिखा भी दिया है। उनके निर्देश पर इस ड्रीम प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट में संरचना से संबंधित आंशिक संशोधन किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को अब बख्तियारपुर तक बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आईएलएंडएफएस को फिजिबिलिटी रिपोर्ट में इसे जोड़ने को कहा है। वैसे दीदारगंज से बख्तियारपुर के बीच का प्रोजेक्ट फेज-2 में रखा जाएगा। एक समय जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के रूप में पटना आयी थीं तो उन्होंने यह ऐलान किया था कि पटना में गंगा किनारे वह मैरिन ड्राइव बनवायेंगी। इसके बाद दशकों तक यह बात चलती रही। मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने इस प्रोजेक्ट में रुचि दिखायी और आईएलएंडएफएस को परियोजना के लिए कंसलटेंट बना दिया गया। काफी दिनों से आईएलएंडएफएस इस परियोजना पर अपना काम करता रहा। इस वर्ष मार्च में ही उसे अपनी रिपोर्ट दे देनी थी पर रिपोर्ट अगस्त में आयी। पथ निर्माण विभाग के सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि यह योजना पूरी तरह से 'फिजिबल' है। गंगा के पानी के बारे में जिस तरह से गाइडलाइन हैं, उस बारे में पथ निर्माण विभाग ने आईआईटी, रुड़की को अपना कंसलटेंट बनाया हुआ था। आईएलएंडएफएस ने रुड़की के अभियंताओं के साथ मिलकर काम किया। दोनों के अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि गंगा के जलस्तर या फिर जल को लेकर इस प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की समस्या नहीं है।

पर्यावरण का मामला भी पूरी तरह फिट है। इस परियोजना के लिए पथ निर्माण विभाग ने पटना के जिलाधिकारी से ब्योरा मांगा है कि वह यह बतायें कि गंगा के किनारे की जमीन कहां पर खेतिहरों की है और कहां सरकारी। जमीन का ब्योरा मिल जाने के बाद इस प्रोजेक्ट का काम आगे बढ़ेगा। पथ निर्माण विभाग के सचिव ने बताया कि संभवत: पैक्स चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन की रिपोर्ट मिल सकेगी। पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख आर डी राम ने इस संबंध में बताया कि फिजिबिलिटी रिपोर्ट के साथ-साथ

एक वायबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार करायी

जा रही है।

वायबिलिटी रिपोर्ट के तहत गंगा किनारे उन जगहों को चिन्हित किया जायेगा जो मनोरंजन की दृष्टि से विकसित किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट को इससे वायबल बनाया जाना संभव हो सकेगा और गंगा किनारे मनोरंजन के नए स्पाट विकसित किए जाने संभव हो सकेंगे। वायबिलिटी रिपोर्ट भी शीघ्र मिल जाने की उम्मीद है।